कृत्रिम सूरज क्या है ? (What is Artificial Sun ? )

 

   हम अगले 10 सालों में पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य से रोशनी प्राप्त करेंगे। काफी लंबे समय से इस पर कार्य चल रहा है। मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम कंपनी द्वारा इस दिशा में लंबे समय से कार्य कर रही है। परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न होने वाले खतरे से अलग इस नए प्रयोग में फ्यूजन का प्रयोग किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है की इससे कृत्रिम रोशनी मिलने के साथ मे यह हमारे पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होगा ।

     हम इसे इस प्रकार समझ सकते है 👉 मुख्य रूप से ब्रह्मांड का प्रमुख ऊर्जा स्त्रोत फ्युजन है  सूर्य और अन्य सभी तारे फ्यूजन की क्रिया से ही ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। जब हल्के कण बहुत अधिक दबाव और तापमान पर आपस में मिलकर एक भारी पदार्थ के अणु का निर्माण करते हैं साथ ही बहुत अधिक मात्रा मे ऊर्जा भी निर्मित होती हैं। सितारों में हल्का कण हाइड्रोजन होता है जो फ्यूज  होने पर हिलियम बनाता है।

     दक्षिण कोरिया ने अपना खुद का सूरज बना लिया है। काफी हद तक यह वास्तविक सूर्य से भी ज्यादा शक्तिशाली दिख रहा है। साउथ कोरिया एक आर्टिफिशियल सूरज (Artificial Sun) को 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान पर 20 सेंकड के लिए चमकाने में कामयाब हुआ है । फ्यूजन के लिए वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन से प्लाज्मा लिया है,जो की  गर्म आयनों से बना था जिनका तापमान 100 मिलियन डिग्री से अधिक था| आयनों को बनाए रखने के लिए उच्च तापमान बनाए रखना जरूरी है। वैज्ञानिकों ने 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस पर 20 सेंकड के लिए कृत्रिम सूरज को चमकाकर एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है । साथ ही चीन के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सूरज (Artificial sun) तैयार करने में सफलता हासिल की है। ये ऐसा परमाणु फ्यूजन (nuclear fusion) है,जो वास्तविक सूर्य से कई गुना ज्यादा ऊर्जा देगा। कृत्रिम सूरज बनाने की ये कोशिश कई साल से जारी थी। कृत्रिम सूरज के प्रोजेक्ट की कामयाबी ने चीन को विज्ञान की दुनिया में उस मुकाम पर पहुंचा दिया है जहां आज तक अमेरिका, जापान जैसे तकनीकि रूप से उन्नत देश भी नहीं पहुंच पाए ।

 

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