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टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला पदक

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               टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत को पहला पदक वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने दिलाया है. उन्होंने 49 किग्रा में रजत पदक हासिल किया है. उनकी इस कामयाबी का  देशभर में जश्न मनाया  जा रहा है |

" गुरु पूर्णिमा की महत्ता "

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                                                   भारत में गुरूओं का अत्यधिक  सम्मान किया जाता है। गुरु ही है जो अपने शिष्य को गलत मार्ग से सही मार्ग पर लाता है। कई पौराणिक कथाओ के अनुसार हमें यह पता चलता है कि किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में गुरु का विशेष योगदान रहा है।                                                      इस दिन महान गुरु महर्षि वेदव्यास जिन्होंने ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना की उनका जन्म हुआ था, इस कारण भी इसे मनाने का महत्त्व बढ़ जाता है । आषाढ़ी पूर्णिमा को वेदव्यास का जन्म माना जाता है। इसी कारण आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। और इस साल गुरू पूर्णिमा 24 जुलाई को मनाया जा रहा है।      ...

"मधुमक्खियों का अस्तित्व खतरे में"

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                     हम सभी को शहद अच्छा लगता है,लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि शहद का निर्माण करने वाली मधुमक्खियों का अस्तित्व अब खतरे में है। पूरी  दुनिया में मधुमक्खियों की घटती संख्या चिंता का विषय है।  बें गलुरु के गांधी कृषि विज्ञान केंद्र की यूनिवर्सिटी ऑफ ऐग्रिकल्चरल साइंसेज में वैज्ञानिक डॉ. वासुकी बेलावडी ने बताया कि मधुमक्खी खत्म होने से कई चीजें खत्म हो जाएगा।         मधुमक्खीयों के विलुप्त होने से साथ सेब, जामुन, ककड़ी, गोभी व चैरी जैसे फल व सब्जियों पर संकट आने वाला है। क्योंकि इन सभी  पौधों का अधिकांश परागण मधुमक्खी ही करती है।        मधुमक्खी की करीब 20,507 प्रजातियां हैं जिनमें से एक दर्जन प्रजातियां शहद पैदा करने वाली होती हैं। लेकिन मधुमक्खियों की सभी प्रजातियां फसलों और जंगलों के लिए जरुरी हैं। अपने देश में लगभग 723 प्रजातियां रहती हैं। लेकिन अब ये धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इनके कम होने से इंसानी गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ेगा।  ‘अगर इसी तरह ...

कृत्रिम सूरज क्या है ? (What is Artificial Sun ? )

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      हम अगले 10 सालों में पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य से रोशनी प्राप्त करेंगे।  काफी लंबे समय से इस पर कार्य चल रहा है। मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम कंपनी द्वारा इस दिशा में लंबे समय से कार्य कर रही है।  परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न होने वाले खतरे से अलग इस नए प्रयोग में फ्यूजन का प्रयोग किया जा रहा है।  वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है की इससे कृत्रिम रोशनी मिलने के साथ मे यह हमारे पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होगा  ।      हम इसे इस प्रकार समझ सकते है 👉   मुख्य रूप से ब्रह्मांड का प्रमुख ऊर्जा स्त्रोत फ्युजन है   ।   सूर्य और अन्य सभी तारे फ्यूजन की क्रिया से ही ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।  जब हल्के कण बहुत अधिक दबाव और तापमान पर आपस में मिलकर एक भारी पदार्थ के अणु का निर्माण करते हैं साथ ही बहुत अधिक मात्रा मे ऊर्जा भी निर्मित होती हैं। सितारों म...